Build and raise your confidence

Every day is a new day in our life. There is much to do today. The early morning sun inspires us to start things freshly and put back our past. Only a handful of us make use of this fresh bunch of energy. In various walks of life this affects the way we behave and our confidence level. Confidence is a key to survive in this world. It is the only key tool to win the rat race in every walk of life. Confidence in ones own capabilities combined with sincere efforts helps one to achieve unthinkable heights. But many times we see that this basic element of confidence is missing in us. As a result of lack of confidence we perform well below our caliber. Be it in a public speech, proposing your beloved, vivas in your college or in an interview or say even on the eve before your exams. This can be due to fear of being rejected or any other reason. If we look into our hearts and think, we will come to know that fear inside us is going to get us nowhere. The confidence inside us is going to take us places. This is because with confidence we can put our thoughts into words in a better and pleasing way. So we have to get out of that shell where we think whether people will accept us as we are? Instead of living in these unending moments of fear and thoughtless analysis it is better if we project ourselves with the skills we have with the gloss of confidence. With confidence we can portray the finer points of our personality in such a way that the places where we do lack are never highlighted. 

Confidence should glow in us only till the point where our personality is boosted. Above this it leads to over-confidence that is harmful. Over confidence results in unsatisfied performance levels as the seed of ego grows into a plant into our mind. We then imagine and make big talks just to maintain our ego. So guys don’t let the seed of ego to germinate in your mind, as this seed should be used only for you to live up to your expectations. Confidence is all about being cool, calm and composed. So guys do u have it in you? If u think u don’t, boost up yourselves as your mind is your greatest mentor .You are your greatest helper…

 

बेचारे मैग्गी नूडल्स का मज़ाक

समयाभाव और आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में कुछ चीज़ें ऐसी भी होती हैं जो वक़्त पड़ने पर हमारा साथ देती हैं, मैग्गी भी उन्ही में से एक है। केवल 2 मिनट में पक कर हमारी तृष्णा को शांत करने वाली आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। मैं ये नहीं कहता की गुणवत्ता की दृष्टि से वो श्रेष्ठ है लेकिन काम समय में अपनी क्षुधा को शांत करने का और कोई सरल उपाय भी शायद नहीं है। आज जो उस बेचारी की गुणवत्ता का आंकलन किया जा रहा है और उसके निर्माताओं से लेकर उसके विज्ञापन करने वाले सितारों तक को नापने की तैयारी हो रही है और किस आधार पे की उसमे लेड की मात्र या ग्लूटोमेट सोडियम या सरल भाषा में अजिनोमोटो की मात्र अधिक है।

अब आप बतायें की जो सब्ज़ियाँ आजकल नदियों के किनारे या ज़मीन के पानी से सींच कर उगाई जा रही हैं उनमे कितने खतरनाक तत्त्व पाये जाते हैं, वो फल जो कार्बाइड इस्तेमाल करके पकाये जाते हैं उनमे क्या है, वो डिब्बाबंद खाना जिनमे प्रिज़र्वेटीव मिलाये जाते हैं वो क्या हैं, डेरी उत्पाद किस तरह बनाये जाते हैं सभी को पता है, बाज़ार में मिलने वाली लगभग हर वस्तु मिलावटी है और ये सत्य सभी जांच एजेंसी जानती हैं, और मज़े की बात तो ये है की जिस जांच एजेंसी ने उत्तर प्रदेश में मांगी पर सवाल उठाया है उसने ये सैंपल फरवरी 2014 में लिए थे, जो सैंपल लिया गया था वो खुद ही अगस्त 2014 में एक्सपायर हो जाती है और उसकी जांच की रिपोर्ट 15 मई 2015 को आती है।  यानी की अगर ये मुद्दा लोगों के स्वस्थ्य से जुड़ा है तो इतने लचर तरीके से उसकी जांच करना और इतना समय लगाना क्या ये हमारे साथ खिलवाड़ नहीं है।

अब बात विज्ञापन करने वालो की, तो कृपया ये बताएं की जो लोग शराब, सिगरेट और पान मसाला या गुटका का विज्ञापन करते हैं वो क्या अमृत बेच रहे हैं जबकि उन्हें तो सीधे सीधे पता है की वो ज़हर हैं और क्या विज्ञापन करने वाले के साथ विज्ञापन दिखाने वाले चैनल ज़िम्मेदार नहीं हैं।

एक आम आदमी क्या ये समझता है की हमारे शरीर को किस चीज़ की कितनी ज़रुरत है, डॉक्टर कहते हैं कैल्शियम, पोटासियम, मैग्नीशियम, आयरन, जिंक, वगेरह ये सभी हमारे शरीर के लिए ज़रूरी तत्व हैं तो क्या हमारा शरीर एक अलॉय है जो इन सब के मिश्रण से बनता है।  आम आदमी को बस अपना पेट भरना है और उसकी ज़रुरत है खाना, अब उसमे क्या है और क्या नहीं ये उसकी ज़रुरत भी नहीं है और उसको जानकारी भी नहीं है।

अब बारी आती है दिल्ली के लोगों के स्वस्थ्य की।  तो कृपया बताएं की दिल्ली का पॉलुशन का लेवल क्या है? क्या ये दिल्ली की आबो हवा सांस लेने के लायक है? क्या इस हवा में हम अपने बच्चों को वो सभी बीमारियां नहीं दे रहे हैं जो खतरनाक हैं। हम इस तरफ से क्यों आँख बंद कर लेते हैं। क्या इसको नियंत्रित करना किसी भी सरकारी विभाग की ज़िम्मेदारी नहीं है।  किस किस चीज़ से बचेंगे और किस किस चीज़ पर पाबंदी लगाएंगे।

एक मित्र में बड़ा ही अच्छा व्यंग भेजा था वो शेयर कर रहा हूँ की एक हॉस्टल में रहने वाले लड़के ने जो चार दिन से बिना नहाये हुए उसी कच्छे में घुमते हुए, हाथ में सुबह के झूठे दूध के मग में वोडका मिलाते हुए और सिगरेट का कश लगाते हुए कहा  “यार ये मैग्गी तो मिलावटी निकली, साली में लेड का ज़हर ही और इससे कैंसर हो सकता है, पता है तुझको”

All About GST (Goods and Sales Tax)

GST टैक्स सुधार के लिए क्रांतिकारी कदम माना जा रहा जीएसटी देश के हर नागरिक को प्रभावित करने वाला है। जानिए जीएसटी से जुड़े हर सवाल का जवाब।
सवालः क्या है जीएसटी?
जवाबः जीएसटी का पूरा नाम है गुड्स एंड सर्विस टैक्स। ये एक अप्रत्यक्ष कर है यानी ऐसा कर जो सीधे-सीधे ग्राहकों से नहीं वसूला जाता लेकिन जिसकी कीमत अंत में ग्राहक की जेब से ही जाती है। अप्रैल 2016 यानी अगले वित्तीय वर्ष से जीएसटी को लागू होना है। इसे आजादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार कदम कहा जा रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद दूसरे कई तरह के टैक्स समाप्त हो जाएंगे और उसकी जगह सिर्फ जीएसटी लगेगा।
सवालः जीएसटी कौन-कौन से टैक्स खत्म करेगा?
जवाबः जीएसटी लागू होने के बाद सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, एडीशनल एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडीशनल कस्टम ड्यूटी (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम (एसएडी), वैट/सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन टैक्स, ऑक्ट्रॉय एंडी एंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, लक्जरी टैक्स खत्म हो जाएंगे।
सवालः तो क्या जीएसटी में कोई टैक्स नहीं लगेगा?
जवाबः जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन टैक्स वसूले जाएंगे पहला सीजीएसटी यानी सेंट्रल जीएसटी जो केंद्र सरकार वसूलेगी। दूसरा एसजीएसटी यानी स्टेट जीएसटी जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलेगी। कोई कारोबार अगर दो राज्यों के बीच होगा तो उस पर आईजीएसटी यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी वसूला जाएगा। इसे केंद्र सरकार वसूल करेगी और उसे दोनों राज्यों में समान अनुपात में बांट दिया जएगा।
सवालः जीएसटी के क्या फायदा होगा?
जवाबः आज एक ही चीज अलग-अलग राज्य में अलग-अलग दाम पर बिकती है। इसकी वजह है कि अलग-अलग राज्यों में उसपर लगने वाले टैक्सों की संख्या और दर अलग-अलग होती है। अब ये नहीं होगा। हर चीज पर जहां उसका निर्माण हो रहा है, वहीं जीएसटी वसूल लिया जाएगा और उसके बाद उसके लिए आगे कोई चुंगी पर, बिक्री पर या अन्य कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इससे पूरे देश में वो चीज एक ही दाम पर मिलेगी। कई राज्यों में टैक्स की दर बहुत ज्यादा है। ऐसे राज्यों में वो चीजें सस्ती होंगी।
सवालः क्या पेट्रोल और शराब पर भी लागू होगा फैसला?
जवाबः पेट्रोल-डीजल की कीमतें आज अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हैं। यही हाल शराब का है। जीएसटी लागू होने के बाद भी फिलहाल ऐसा जारी रहेगा। क्योंकि राज्यों की डिमांड पर केंद्र सरकार शराब को जीएसटी से बाहर रखने पर राजी हो गई है जबकि पेट्रो पदार्थों पर उसने निर्णय लिया है कि ये रहेंगे तो जीएसटी के अंदर लेकिन इनपर राज्य पहले की तरह ही टैक्स वसूलते रहेंगे। यानी पेट्रोल, डीजल और एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में राज्यों में जो अंतर देखने को मिलता है वो मिलता रहेगा।
सवालः जीएसटी पर राज्यों के हाथ से तमाम टैक्स फिसलेंगे उनकी टैक्स भरपाई कौन करेगा?
जवाबः जीएसटी लागू होने से केंद्र सरकार, कारोबारी, दुकानदार व उपभोक्ता सबको तकरीबन फायदा होगा। हालांकि राज्यों को इससे कुछ नुकसान झेलना पड़ सकता है लेकिन उनको जितना नुकसान होगा तीन साल तक उसकी भरपाई केंद्र सरकार करेगी। चौथे साल 75 फीसदी और पांचवें साल 50 फीसदी नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार करेगी। केंद्र सरकार राज्यों को भरपाई की गारंटी देने के लिए इसके लिए संविधान में भी व्यवस्था करने पर भी तैयार हो गई है।
सवालः जीएसटी से सरकार को क्या फायदा होगा?
जवाबः जीएसटी लागू होने के बाद देश की जीडीपी ग्रोथ में तकरीबन दो फीसदी तक का उछाल आने का अनुमान है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि टैक्स की चोरी रुकेगी क्योंकि अभी टैक्स कई स्तरों पर वसूला जाता है इससे हेराफेरी की, धांधली की गुजाइश ज्यादा रहती है। जीएसटी के चलते टैक्स जमा करना जब सुविधापूर्ण और आसान होगा तो ज्यादा से ज्यादा कारोबारी टैक्स भरने में रुचि दिखाएंगे। इससे सरकार की आय बढ़ेगी। व्यापारियों को भी जब अलग-अलग टैक्सों के झंझट से मुक्ति मिलेगी तो वे भी अपना व्यापार सही से कर पाएंगे। टैक्स को लेकर विवाद भी कम होंगे। अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
सवालः कैसे वसूला जाएगा जीएसटी?
जवाबः जीएसटी की वसूली ऑनलाइन होगी। वस्तु के मैनुफैक्चरिंग के स्तर पर ही इसे वसूल लिया जाएगा। किसी वस्तु का टैक्स जमा होते ही जीएसटी के सभी सेंटरों पर इस बाबत जानकारी पहुंच जाएगी। उसके बाद उस वस्तु पर आपूर्तिकर्ता, दुकानदार या ग्राहक को आगे कोई टैक्स नहीं देना होगा। अगर माल एक राज्य से दूसरे राज्य जा रहा है तो उसपर चुंगी भी नहीं लगेगा। यानी बॉर्डर पर ट्रकों की जो लंबी कतारें अभी दिखती हैं वे गायब हो जाएंगी।
सवालः जीएसटी की दर कौन तय करेगा?
जवाबः जीएसटी संबंधित फैसले लेने के लिए संवैधानिक संस्था जीएसटी काउंसिल का गठन किया जाएगा। जीएसटी काउंसिल में केंद्र व राज्य दोनों के प्रतिनिधि होंगे। इसके मुखिया केंद्रीय वित्त मंत्री होंगे जबकि राज्यों के वित्त मंत्री सदस्य होंगे। जीएसटी काउंसिल जीएसटी की दर, टैक्स में छूट, टैक्स विवाद, टैक्स दायरे व अन्य व्यवस्थाओं पर सिफारिशें देगी।
सवालः जीएसटी इतना फायदेमंद तो अब तक क्यों अटका हुआ था?
जवाबः जीएसटी को लेकर राज्य सरकारें नुकसान की भरपाई पर अड़ी थीं और तमाम कोशिशों के बावजूद इसका कोई सर्वमान्य फॉर्मूला नहीं निकाला जा सका। अब सरकार ने राज्यों को नुकसान भरपाई का जो फॉर्मूला सुझाया है उसपर राज्यों ने सहमति दी है। केंद्र में मजबूत सरकार और तमाम राज्यों में बीजेपी की सरकार आने से भी स्थिति आसान हुई है…

Leader

You cannot teach somebody to be a leader. They are born with their leadership qualities. one cannot inherit these qualities from their parents or party, you have to prove that gut of yours.

अहम का टकराव

आज कुछ हिंदी में लिखता हूँ ,

एक सूखा पत्ता पेड से टूट जाता है तो गलती किसकी है ?

उस आंधी की जो उसे उड़ा ले गयी ?

उस पेड की जो उसे संभाल नहीं सका और टूट जाने दिया ?

या फिर उस पत्ते की जो सहते सहते थक कर टूट गया ?

आज कल की जिंदगी कुछ ऐसी ही हो चली है , अहम का टकराव परिवारों को और रिश्तों को बिखेर रहा है …

ज़रा सोचिये